रविवार, 23 अक्तूबर 2011

जीवन का पार्ट -२ शुरू हो गया


ऐसा लगता है ...जीवन का पार्ट -२ शुरू हो गया !...अनजाने लोग ...अनजाना सफर !...न ख्वाहिश...न हताशा ...न कोई तमाशा...बहुत ऊंचाई से जैसे अपना घर भी बिराना लगता है...अतीत कुछ ऐसा ही लग रहा है...कुछ चहरे कभी के देखे हुए से लगते हैं !...लेकिन यह विराग नहीं है...कुछ अलग ही तरह का राग है...कुछ अलग ही तरह का संवाद !!