के चुनाव अपने शबाब पर हैं ...परिणाम भी मार्च के फर्स्ट वीक तक आ जायेंगे...फिर सब अपने ढर्रे पर चलने लगेगा!...समाज की तरक्की के लिए जरूरी है की शिक्षा और खेती-किसानी के बारे मैं गंभीर काम किये जाएँ...
ऐसा लगता है ...जीवन का पार्ट -२ शुरू हो गया !...अनजाने लोग ...अनजाना सफर !...न ख्वाहिश...न हताशा ...न कोई तमाशा...बहुत ऊंचाई से जैसे अपना घर भी बिराना लगता है...अतीत कुछ ऐसा ही लग रहा है...कुछ चहरे कभी के देखे हुए से लगते हैं !...लेकिन यह विराग नहीं है...कुछ अलग ही तरह का राग है...कुछ अलग ही तरह का संवाद !!